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"मेरी कहानी - मेरी जुबानी" पर्यावरण मित्र दिव्या कुमारी जैन
February 16, 2020 • Dr.Mohan Bairagi • literature News
पर्यावरण चेतना का अभियान चलाते चलाते स्वयम पर्यावरण का पर्याय बनी
चित्तोड़ /कोटा की दिव्या कुमारी जैन 
 
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पर्यावरण  संरक्षण आज की महति आवश्यकता है । अगर स्वयम को अथवा आस पास के वातावरण को सुरक्षित व संरक्षित रखना है तो हमे पर्यावरण को सुरक्षित रखने रखने का प्रयास करना होगा । पर्यावरण संरक्षण को जीवन का अंग बनाना होगा । 
   देखा जाए तो पर्यावरण प्रदूषण की समस्या के लिए भौतिक व मानवीय दोनों कारण जिम्मेदार हैं ,इनसे ही हमारे चारों ओर की वायु , जल , भूमि,पेड़-पौधे व भूमण्डल प्रभावित हो रहे हैं । इससे न केवल मानव जीवन बल्कि जीव-जंतु के अस्तित्व व स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है । 
      वर्तमान में पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले कारणों में पॉलीथिन की थैलियां व डिस्पोजल भी बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। बीते20-25 वर्षों में पॉलीथिन की थैलिया हमारे जीवन का प्रमुख अंग बन  चुकी है । आज व्यक्ति हर छोटी से छोटी वस्तु भी प्लास्टिक की थैली में ला रहाहै वह सामान लेकर थैली को खुले में फेंक देता है या फिर उसमें कचरा या बची हुई सामग्री बांध कर फेंक देता है ।और यही थैलिया धरती के उपजाऊपन,नदी नालों, पेड़ पौधों,मानक स्वास्थ्य व जीव जंतुओं के लिए नुकसान का कारण बन रहे हैं।  
        अगर होंसले बुलन्द हो ,पक्की लगन हो ,पवित्र भावना हो तो व्यक्ति असम्भव को भी सम्भव बना सकता है ।कभी कभी व्यक्ति के जीवन ।के ऐसी घटना घटित हो जाती है कि उज़के जीवन की दशा व दिशा ही बदल जाती है । ऐसा ही कुछ चित्तौड़गढ़ जिले के गांधीनगर ( मूलतः कोटा की ) में रहने वाली 9 वर्षीय बालिका दिव्या कुमारी जैन के साथ हुआ। 
   दिव्या ने बताया कि आज से 11 वर्ष पूर्व की बात है वह गर्मियों की छुट्टियों में अपने दादाजी व नानाजी के घर कोटा में गई हुई थी ।तब उसकी उम्र मात्र 9 वर्ष थी ।वहाँ उसने एक मृत गाय को देखा जिसके बारे में पता चला कि वह आंतो में पॉलीथिन की थैलियां फंसने से मरी है ,तो उस नन्ही अबोध बालिका ,उज़के बाल मन को बहुत आघात लगा । दिव्या ने पिता से सुन रखा था कि पॉलीथिन की थैलिया मानव स्वास्थ्य व पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचा रही है । लेकिन इतना नुकसान  भी हो रहा है यह उसने पहली बार देखा ।  
        बस यही से प्रेरित होकर उस नन्ही बालिका ने ठान लिया कि वह इस विषय मे कुछ ऐसा करेगी जिससे समाज को विशेषकर पॉलीथिन की थैलियों को उपयोग में लेने वालों को नई दिशा दे सके । 
    दिव्या ने अपनी भावना अपने पिता श्री संजय कुमार जैन  जो कि चित्तौड़गढ़ जिले के ही राजकीय विद्यालय में शिक्षक है को बताई ,ओर यही से उसने पर्यावरण के प्रति चेतना जगाने की शुरुआत -"पॉलीथिन हटाओ- पर्यावरण बचाओ " अभियान चलाकर की ।उस नन्ही बालिका ने पॉलीथिन से होने वाले नुकसान को बताकर इसको उपयोग में नही लेने के लिए घर घर जाकर लोगो को जागरूक करने का निश्चय किया । 
     दिव्या ने बताया कि उसने लोगों को पॉलीथिन कर नुकसान लिखकर अपील पत्र व पुरानी साडियो के कपड़े से बने थैले सिलवाकर निशुल्क वितरित किए ओर अपील की कि वे पॉलीथिन को उपयोग में ना लें । 
   शुरू में उस बालिका ने अपने हाथ खर्चे से एवम दादाजी , नानाजी आदि द्वारा ड्रेस के लिए दिए गए पैसों से ड्रेस न लाकर थैले सिलवाये व वितरित किये । और फिर पापा से मदद के लिए कहा । इस प्रकार दिव्या ने इस सिलसिले को आगे बड़ाया जो आज भी बिना किसी से आर्थिक सहायता लिए चल रहा है । वह अब तक हजारों थैले ,पम्पलेट व स्टीकर निशुल्क वितरित कर चुकी है ।उसने विधायक , सांसद ,केंद्र व राज्य सरकार के मंत्री , राज्यपाल , राष्ट्रपति , मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री , प्रशासनिक अधिकारी ,......... सबको कपड़े के थेले भिजवाये व निवेदन किया कि न केवल राज्य बल्कि पूरे राष्ट्र में पॉलीथिन बेन हो । 
      दिव्या के अभियान को सबने सराहा ,इसे हर स्तर पर प्रेरणा व आशीर्वाद मिला साथ ही राज्य व राष्ट्र स्तर से भी पत्र व प्रशंसा पत्र मिले । इससे दिव्या के उत्साह को वृध्दि  मिली । 
  पर्यावरण को पॉलीथिन की थैलियों से हो रहे नुकसान के बारे में दिव्या घर घर जाकर लोगों से सम्पर्क करने के साथ साथ सार्वजनिक स्थानों ,बैठकों(राजनीतिक व सामाजिक) विद्यालयों ,प्रशिक्षण स्थलों पर जाकर सम्बोधन  देती साथ ही लोगो को पॉलीथिन को उपयोग में न लेने का संकल्प दिलाती । इसने विद्यालयों में भी हजारों की संख्या में बच्चों को पॉलीथिन को उपयोग में नही लेने ,कपड़े व पेपर के बैग को उपयोग में लेने तथा पौधारोपण व उनकी सुरक्षा की सामूहिक शपथ दिलाई । छोटी सी मात्र 10- 11 वर्ष की इस बालिका के कार्य व साहस तथा अभियान के प्रति लगन को देखकर लोग आश्चर्यचकित हो जाते । 
      इस अभियान की तत्कालीन गृहमंत्री श्री शांति धारीवाल, चित्तौड़ के तत्कालीन कलेक्टर श्री समित शर्मा व अन्य गणमान्य जी ने भी पत्र लिखकर प्रशंसा की व आशीर्वाद दिया । दिव्या ने हजारो लोगों से शपथ पत्र भी भरवाए जिसमे राजनेता, प्रशासनिक अधिकारी,कर्मचारी,संत अध्यापक , छात्र,व्यापारी आदि  प्रमुख थे । 
        इस विषय मे समाचार पत्रों, एलेक्ट्रिक मीडिया  मासिक पत्रिकाओं ने भी दिव्या के इस पुनीत अभियान  को जन जन तक पहुचाने ।के सराहनीय योगदान दिया । इनके माध्यम से दिव्या का अभियान जन जन का अभियान बना । मासिक पत्रिकाएं जो कि राजस्थान ,उत्तराखंड ,दिल्ली, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश व अन्य राज्यों की थी वहां की पत्रिकाओं में भी दिव्या के अभियान को स्थान दिया गया । अलग अलग संस्थाओं ने भी प्रेरित होकर कपड़े के थैले वितरित किये तथा जागरूकता रैलियां निकाली । 
    उस समय दिव्या के अभियान व पॉलीथिन पर बीएड कालेज के छात्रों ने लेसन प्लान बनाये । जिसकी सूचना दिव्या को भी मिली । राय पब्लिकेशन की वार्षिक विशेषांक बजट 2012 -13 प्रतियोगिता परीक्षा गाइड में भी दिव्या के अभियान पर प्रश्न बना -( दिव्या जैन --इन्होंने पॉलीथिन हटाओ- पर्यावरण बचाओ संदेश के साथ पर्यावरण के प्रति चेतना जागृत की ।) 
       तत्कालीन गृहमंत्री श्री शांति धारीवाल साहब के कोटा आगमन पर  दिव्या उनसे मिली तथा राज्य में पॉलीथिन पर प्रतिबंध की मांग की । उन्होंने दिव्या की बात को सुना ओर मुस्कराए । कोटा में नगर निगम के माध्यम से  विशाल स्तर पर जन जागरण रैली जनवरी 2010 में निकाली गई और उसमे माननीय धारीवाल साहब पूरे रास्ते मे पैदल चले, दिव्या ने रैली में पूरे मार्ग में माइक से उद्बोदन व संदेश दिया ।   
       राज्य में 1 अगस्त 2010 से पॉलीथिन को बेन कर कानून बनाया गया जिसमें दंड व सजा का प्रावधान भी रखा गया। दिव्या ने माननीय मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत साहब को पत्र लिखकर आभार व्यक्त किया । जिसका जवाब भी दिव्या को मिला  उनके चित्तोड़ आगमन पर दिव्या ने  उन्हें आभार पत्र भी दिया । 
      राज्य में पॉलीथिन पर बेन के बाद दिव्या ने पॉलीथिन मुक्त भारत अभियान  की शुरुआत 2010 में की , जिसमे उसका लक्ष्य था पॉलीथिन पूरे भारत में प्रतिबंधित हो । चूंकि वह पूरे देश मे घूम नही सकती थी तो उसने कहि राज्यो के मुख्यमंत्री , भारत के प्रधानमंत्री ,राष्ट्र्पति जी, राज्यपाल जी ,केंद्र सरकार के माननीय मंत्री जी आदि को गत 10 वर्षों में सेंकडो की संख्या में पत्र लिखे हैं । लक्ष्य एक ही है पॉलीथिन पर पूरे भारत में पूर्ण प्रतिबंध । मासिक पत्रिकाओं ने दिव्या का संदेश कहि राज्यों में पहुंचाया  है । कही राज्यों में पॉलीथिन पर बेन लगाया भी है ।  
       दिव्या ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र  मोदी जी को भी गत 5-6वर्षों में 50 से अधिक पत्र  इस विषय मे लिखे है की धरती के उपजाऊपन,जल की शुद्धि, बीमारियों की रोकथाम ,पेड़-पौधों व जीव जंतुओं की रक्षार्थ व स्वच्छ भारत के लिए पॉलीथिन  को पुरे देश मे प्रतिबंधित कीजिये । इसमे कहि स्तर पर सफलता भी मिली है । माननीय प्रधानमंत्री जी ने अपने उद्बोधनों में कही बार पॉलीथिन के दुष्प्रभाव को बताकर इस विषय मे जन जागरण का आह्वान भी किया है । और भी उदाहरण हैं । 
   केंद्र व राज्य सरकार ,स्वयम सेवी संस्थाए ,पर्यावरणविद,पर्यावरण प्रेमी समाज मे जागरूकता पैदा करने का कार्य कर रहे हैं लेकिन इस विषय मे बालिका दिव्या जैन की पहल सराहनीय है । ऐसी सोच व जजबा विकसित कर समाज मे भागेदारी निभानी चाहिए जिसका कि माहौल तैयार हो चुका है । दिव्या ने जो लक्ष्य निर्धारित किया था इन 11 वर्षों में वह पूर्णता की ओर अग्रसर है ।उसे आशा है शीघ्र ही देश पॉलीथिन के जहर से मुक्त होगा और उसकी पॉलीथिन मुक्त  भारत की कल्पना साकार होगी ।  
      दिव्या ने अपने अभियान को पूरे देश मे सम्प्रेषित करने में लिए 'पर्यावरण मित्र पत्रिका ' का भी सम्पादन किया है जिसमे अब तक 10 संस्करणों के माध्यम से 38000 पत्रिकाओं का वह पूरे देश मे प्रमुख लोगों तक प्रमुख जगहों तक निशुल्क वितरित किया है । इंटरनेट के माध्यम से भी पत्रिका व वीडियो द्वारा संदेश दिया है । यह कार्य  निश्चित रूप से पूरे देश को प्रेरित कर रहै हैं । 
    इस वर्ष जब राजस्थान का बजट बनना था दिव्या को भी बजट पूर्व तैयारी बेठक में सचिवालय जयपुर बुलाया गया था  माननीय मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दिव्या ने 17 सुझाव रखे थे । 
    दिव्या को अपने अभियान के लिए भारत भर से प्रमुख लोगो के सैकड़ों पत्र प्राप्त हुए है । जिसमे उसकी , उसके कार्य की , उसके जजबे व हिम्मत की प्रशंसा की गई है । इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि पर्यावरण का अभियान चलाते चलाते दिव्या कुमारी जैन स्वयम पर्यावरण का पर्याय बन गई है । उसे कहि प्रशंसक तो पर्यावरण गर्ल के नाम से भी सम्बोधित करने लगे है । 
      दिव्या को इन 10 -11 वर्षों में 80 से भी अधिक। बार सम्मानित किया जा चुका है ।  कुछ प्रमुख सम्मानों के नाम - 
 1. पर्यावरण मित्र सम्मान
2 स्वच्छता अग्रदूत सम्मान 
3 राष्ट्रीय बाल गौरव 
4 सृजन श्रीसम्मान 
5 वन विस्तारक सम्मान 
6 जल स्टार 
7 ग्रीन आइडल सम्मान 
8 ग्रीन पैरेट अवार्ड्स 
 9 राष्ट्रीय जैन युवा गौरव सम्मान 
10 पर्यावरण मित्र गौरव सम्मान 
11पर्यावरण प्रहरी सम्मान 
12 महारानी पद्मिनी सम्मान 
13 दो बार जिला स्तरीय सम्मान 
14 राज्य स्तरीय सम्मान ( माननीय मुख्य मुख्यमंत्री जी के कर कमलो से ) 
     दिव्या के प्रयास रंग लाएँ । यह धरा पोलिथिन के जहर से मुक्त हो । बून्द बून्द से जैसे घड़ा भरता है उसी प्रकार दिव्या नन्ही गिलहरी बनकर सेतु बांधने का जो प्रयास कर रहीहै  ,उसे उसमे कामयाबी मिले । यह भावना है । 
नोट - दिव्या अभी 20 वर्ष की है और  बीएड कर रही है ।