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भारत द्वारा चीन की शिकस्त
September 5, 2020 • रंजना मिश्रा
भारत द्वारा चीन की शिकस्त
 
पैंगोंग लेक के फिंगर एरिया में चार महीने से विवाद चल रहा है। पैंगोंग लेक के आसपास पहाड़ी के निकले छोर फिंगर एरिया कहलाते हैं। ऐसे आठ छोर निकले हुए हैं। 5-6 मई को चीन ने फिंगर-4 की ऊंची जगह पर कब्जा कर लिया था। चीनी सेना ने फिंगर 5-8 के बीच अपने सैनिकों की तैनाती कर दी थी। इस इलाके में टेंट, बैरक और हेलीपैड भी बना लिए थे। बातचीत के बाद भी चीन पीछे हटने को तैयार नहीं था। चीन को अपनी सेना और तकनीक का इतना गुरूर है कि वो मनमानी करने पर उतारू है। किंतु भारतीय सेना के पराक्रम ने चीन को चारों खाने चित कर दिया है। पर चीन भी इतना ढीठ है कि वह भारत से बार-बार मुंह की खाने के बाद भी मानने को तैयार ही नहीं है।
      चालबाज चीन ने 29 और 30 अगस्त की रात को पैंगोंग झील के दक्षिणी हिस्से में स्थित ब्लैक टॉप नाम की चोटी पर घुसपैठ करने की कोशिश की थी जिसे भारतीय सेना ने अपने पराक्रम से नाकाम कर दिया।भारतीय सेना ने उन्हें पीछे धकेल कर 15000 फीट ऊंचाई पर स्थित ब्लैक टॉप पर अपना अधिकार जमा
 लिया है।ब्लैक टॉप से चीन की सेना के हर मूवमेंट पर सीधे नजर रखी जा सकती है। ब्लैक टॉप पैंगोंग से गुजर रही एलएसी की सबसे ऊंची चोटी है।यहां से पैंगोंग तक नजर रखी जा सकती है। भारतीय सेना की इस कार्यवाही से चीन बौखलाया हुआ है।
       यदि चीन 29 अगस्त की रात को इस ब्लैक टॉप पर कब्जा कर लेता तो वह पूरे चुशूल सेक्टर पर नजर रख सकता था और यह स्थित भारत के लिए बहुत नुकसानदायक होती। इस इलाके में भारतीय सेना की एक हवाई पट्टी है, कई जरूरी मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर यहां मौजूद हैं। यह इलाका इतना समतल और चौड़ा है कि यहां बड़े-बड़े टैंकों और तोपों को आसानी से तैनात किया जा सकता है।   
        ऑपरेशन ब्लैक टॉप के अंतर्गत ब्लैक टॉप के पास मौजूद 300 चीनी सैनिकों के इरादों को भांपकर भारतीय फौज ने पहले एक्शन लिया। इसमें स्पेशल फ्रंटियर फोर्स का इस्तेमाल किया गया।स्पेशल फ्रंटियर फोर्स भारत की वह स्पेशल फोर्स है जिसमें तिब्बती लोग भर्ती किए गए हैं।
        इसके बाद 30 और 31 अगस्त की रात को भी चीन की सेना ने दोबारा आगे बढ़ने की कोशिश की तो इसके जवाब में भारतीय सेना ने पास की और कई पहाड़ियों पर (हाइट्स पर) कब्जा कर लिया।भारतीय सेना की यह कार्यवाही पेट्रोलिंग पॉइंट 27 से पेट्रोलिंग पॉइंट 31 के बीच की गई है। इन सारे पेट्रोलिंग पॉइंट को 1962 के युद्ध में चीन ने भारत से छीन लिया था। जिन्हें अब 2020 में भारतीय सेना ने चीन की सेना से छीन कर वापस अपने अधिकार में ले लिया है।इस समय पेंगोंग के दक्षिणी किनारे से लेकर रेजांगला तक हर पहाड़ी पर भारतीय सेना ने अपना कब्जा कर लिया है। इस कारण हालात बहुत तनावपूर्ण हो गए हैं और चीन फिर से कोई दुस्साहस करने की तैयारी में है।
       चीन पैंगोंग लेक के दक्षिणी हिस्से पर नियंत्रण करके भारत के खिलाफ एक नया मोर्चा खोलना चाहता था। लेकिन 29 और 30 अगस्त की रात भारतीय सेना ने चीन की इस योजना पर पानी फेर दिया। युद्ध के दौरान जो सेना जितनी ज्यादा हाइट्स पर होती है, उसे रणनीतिक तौर पर उतना ही फायदा मिलता है और इस समय सभी ऊंची चोटियों पर भारतीय सेना का अधिकार हो गया है, जबकि चीन की सेना अब निचले इलाकों में है।ऊंची चोटियों पर तैनात होने से भारतीय सेना, चीन के दक्षिणी इलाके पर, पैंगोंग लेक के कब्जे वाले इलाके में और चुशूल वैली में भी नजर रख पाएगी। पैंगोंग लेक के दक्षिणी किनारे पर कब्जा करने से, भारत चीन को फिंगर एरिया, देप्सांग और गोगरा से हटाने की कार्यवाही भी कर सकता है।
       अब स्थिति यह है कि चीन ने पैंगोंग के उत्तरी हिस्से में 8 किलोमीटर इलाके पर कब्जा किया हुआ है तो भारत ने दक्षिणी हिस्से में 40 किलोमीटर के इलाके में तैनाती कर दी है।
       अब एलएसी पर दोनों सेनाएं आमने-सामने हैं और स्थिति बहुत ही तनावपूर्ण है। ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारियों के बीच बातचीत जारी है, किंतु कोई परिणाम नहीं निकल रहा। चीन भारत पर सीमा उल्लंघन करने का आरोप लगा रहा है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद में अमेरिका अब खुलकर भारत का साथ दे रहा है।अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने एक न्यूज़ चैनल से बातचीत के दौरान कहा है कि चीन को रोकने के लिए अमेरिका भारत जैसे देशों का साथ देगा।
      भारत के इस पराक्रम पर पूरी दुनिया हैरान है। कई देश जो चीन का मुकाबला करना चाहते हैं, किंतु हिम्मत नहीं जुटा पा रहे,वो सभी देश भारत के इस पराक्रम पूर्ण रवैए से जरूर प्रेरित और उत्साहित होंगे और चीन के खिलाफ खड़े होने की शक्ति और मनोबल जुटा पाएंगे।
          अब उत्तर की दिशा में भी भारतीय सेना ऐसी ही कार्यवाही कर सकती है। क्योंकि चीन बार-बार बातचीत के बाद भी मानने को तैयार नहीं है। भारत ने चीन को ऐसा करारा जवाब दिया है, जिसकी चीन ने उम्मीद भी नहीं की थी।
 
रंजना मिश्रा ©️®️
कानपुर, उत्तर प्रदेश