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दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा संकल्प पर्व के उपलक्ष्य में "मानव जीवन में प्रकृति का महत्त्व" विषय पर काव्य पाठ (वेबिनार) का आयोजन 
July 14, 2020 • Dr.Mohan Bairagi
दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा संकल्प पर्व के उपलक्ष्य में "मानव जीवन में प्रकृति का महत्त्व" विषय पर काव्य पाठ (वेबिनार) का आयोजन 

दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार का अनुसरण करते हुए, प्रकृति के प्रति अपनी सद्भावना प्रकट करने हेतु दिनांक 28  जून 2020 से 12 जुलाई 2020 तक संकल्प पर्व मनाया जा रहा है । इसी उपलक्ष्य में दिनांक 12 जुलाई 2020 को संकल्प पर्व के अंतिम दिवस पर दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा "मानव जीवन में प्रकृति का महत्त्व" विषय पर काव्य पाठ (वेबिनार) का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रामशरण गौड़, अध्यक्ष, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड द्वारा की गयी तथा सुश्री रजनी अवनी, कवयित्री व श्रीमती अंजना अंजुम, कवयित्री एवं समाज सेविका वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं । इस कार्यक्रम का प्रसारण सुदर्शन टी.वी द्वारा करवाने का संयोजन श्री प्रवीण आर्य द्वारा किया जायेगा  ।

सुश्री रजनी अवनी ने अपने काव्य के माध्यम से वृक्षों की मानव जीवन में भूमिका व आवश्यकता बतायी।  साथ ही, उन्होंने अपने गीतों के द्वारा श्रोताओं से प्रकृति की रक्षा करने, उससे प्रेम करने तथा उसके प्रति संवेदनशीलता रखने का आह्वाहन किया।

श्रीमती अंजना अंजुम ने काव्य पाठ द्वारा सभी श्रोताओं से लकड़ी का खनन रोकने, वृक्ष लगाने, तथा रोज़ एक वृक्ष को पानी देने का संकल्प कर धरा को संवारने में अपना योगदान देने का निवेदन किया ।

श्री प्रवीण आर्य द्वारा अपने वक्तव्य में कहा कि प्रकृति से छेड़-छाड़ के भयावह परिणाम हो सकते हैं उनमें से एक का हम कोरोना महामारी के रूप में सामना कर ही रहे हैं इसलिए यह अत्यंत आवश्यक हो गया है की हम प्रकृति के प्रति स्नेहपूर्ण भाव रखें, उसकी रक्षा करें।

डॉ. रामशरण गौड़ ने श्रोताओं को बताया कि मानव शरीर पञ्च तत्वों- मिट्टी, पानी, अग्नि, वायु और शून्य से निर्मित है जोकि उसे पोषित करते हैं। इन पांच तत्वों का संतुलन ही हमारे तन व मन को स्वस्थ रखता है। यह पांच तत्व प्रकृति के महत्त्वपूर्ण अंग हैं अतः मनुष्य हेतु इनका संरक्षण करना, न्यायिक उपयोग करना तथा इनके प्रति संवेदनशीलता रखना अतिआवश्यक है। उन्होंने सभी श्रोताओं से आग्रह किया कि वह संकल्प पर्व को अपने जीवन का अंग बनाये और निरंतर समयानुसार तथा स्थानुसार एक वृक्ष लगाने का प्रयास करें और वृक्षारोपण को अपने जीवन का अंग बनाये I