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हिन्दी में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी : प्रसार की लकीरें
December 31, 2019 • ओम विकास • literature News

20 वीं सदी में आर्थिक विकास का आधार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी रहा । नवाचार एवं आविष्कारोन्मुखी प्रवृत्ति से समाज विकसित और अविकसित वर्गों में बँटने लगे । 21 वीं सदी में संज्ञानिकी का प्रबल प्रभाव है । लोक संस्कृति की संरक्षा की चिंता बढ़ने लगी है । प्रति वर्ष 2 प्रतिशत विश्व भाषाओं का लोप होता जा रहा है । प्रति वर्ष लगभग 60 लाख पृष्ठ विज्ञान शोध पत्रिकाओं में, और लगभग 165 लाख पृष्ठ विज्ञान पुस्तकों के रूप में प्रकाशित हो रहे हैं । आधुनिक विज्ञान नागरी में नगण्य है, परिणाम  - 

लोक व्यवहार में नव नवीन वैज्ञानिक सोच और प्रौद्योगिकी का अभाव, और परमुखापेक्षी समाज का सातत्य ।  इसलिए प्राथमिकता हो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में नागरी प्रयोग का संवर्धन । संक्रमण काल में भारत के न्यूनतम लक्ष्य़  विश्व लक्ष्यों के लगभग 0.5 प्रतिशत हो सकते हैं ।

 भारत में 2010 – 2020 इन्नोवेशन डिकेड अर्थात् नवाचार दशक मनाया जा रहा है । साइंस कांग्रेस में प्रधान मंत्री जी ने घोषणा कर दी । इति श्री । पहले से चले आ रहे प्रोग्राम , जैसे विज्ञान  रेलयात्रा, विज्ञान प्रसार आदि उसी गति से चल रहे हैं ।

विज्ञान प्रसार का पहला ल्क्ष्य कार्य होता है  अंध विश्वासों की अवैज्ञानिकता को सिद्ध करना; लेकिन  अंध विश्वासों को  मात्र जुठलाते रहने से काम नहीं बन रहा । कानूनी रोक का कोई प्रावधान नहीं बन पाया । आये दिन नए नए प्रकरण चर्चा में आ रहे हैं । इसके मूल कारण पर कुठाराघात करने की आवश्यकता है । मूल कारण है प्राथमिक शिक्षा में लोक भाषा को हेय बनाते जा रहे हैं , सरकार की इस अवैज्ञानिक नीति से विज्ञान के प्रति अभिरुचि नहीं बन पा रही;  आम आदमी बच्चों से विज्ञान सम्मत संवाद नहीं कर पा रहा ।

विज्ञान प्रसार का दूसरा स्वयं सुखाय कार्य है खबरिया लेखन । अखबारों की नीति व्यवसाय परक है, सैक्स, हिंसा, बलात्कार की खबरें प्रधानता पाती हैं;  विज्ञान और नैतिकता गौण बन गए हैं । खबरिया लेखन से कम से कम हिन्दी में कुछ विज्ञान सम्बंधी सूचनात्मक सामग्री प्रकाशित होती रहती है । आवश्यकता है हिन्दी में अधिक से अधिक विश्लेषणात्मक सामग्री के प्रकाशन की । लक्ष्य हो आम आदमी आविष्कारोन्मुखी बने, समस्या का स्वयं विज्ञान सम्मत समाधान निकालने को उत्सुक रहे । अभी तक विश्व में  वैज्ञानिकों की तीसरी बड़ी जनसंख्या वाले भारत में विज्ञान अथवा पौद्योगिकी की एक भी सावधि (मासिक) शोध परक जर्नल प्रकाशित नहीं होता है । हिन्दी में  लिखे को  प्रौन्नति (प्रोमोशन) के समय माना नहीं जाता, न तो सरकारी विभागों में और नहीं एकेडेमिक / शैक्षणिक क्षेत्र में ।  फिर कौन लिखे, क्यों लिखे ? विज्ञान प्रसार के लक्ष्यों में इसे कोई स्थान नहीं ।

विज्ञान प्रसार का  तीसरा प्रस्तुतीय लक्ष्य है संगोष्ठी आयोजन । श्रेष्ठ कार्य है, इस बहाने से कभी कभार समान विचार धारा के चिंतावान मिल बैठ सुन-सुना लेते हैं; लेकिन लक्ष्य क्या थे, कहाँ तक पहँचे, क्या अवरोध थे, किन किन साधनों की कमी रही, कितना वित्त प्रावधान किए जाने की आवश्यकता है , अन्य देशों के लिए विज्ञान प्रसार मॉडल देने में कितने समर्थ रहे, इत्यादि अनेक प्रश्न अनुत्तरित रह जाते हैं ।

विज्ञान प्रसार की कुछ लकीरें खींचने से काम नहीं चलेगा, बड़ा केनवास बनाने की जरूरत है । विज्ञान प्रसार के दूरगामी लक्ष्य निर्धारित किए जाने की जरूरत है । आम आदमी की जरूरत / माँग को औपचारिक लक्ष्य आँकड़ों के रूप में रखना आवश्यक है । तदनुसार  माँग-आपूर्ति श्रंखला सुनिश्चित की जाए ।

 शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, और प्रसार प्रविधि  तीन प्रमुख क्षेत्रों में कतिपय सुझाव इस प्रकार हैं – 

शिक्षा

  1. उच्च तकनीकी शिक्षाके पाठ्यक्रम में प्रथम वर्ष की पढ़ाई हिन्दी, लोकभाषा, इंग्लिश में मिश्रित हो । प्राइवेट उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थाओं में भी ग्रामीण अंचल के गरीब विद्यार्थियों को 25% प्रवेश का प्रावधान हो, जैसा स्कूली शिक्षा में सम्भव हो सका है ।  {उच्च तकनीकी शिक्षा संस्थानों , जैसे AIIMS, IITK, IITD, IITB आदि  के प्रथम वर्ष में ही आत्महत्या कर लेने वाले मेधावी किशोरों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दें । अपनी भाषा में उच्च शिक्षा से वंचित विवश हुए आत्महत्या की घटनाओं पर असंवेदनशील हैं  शिक्षा प्रशासक और योजनाकार।}

 

  1. मैथ्स / आई टी ओलंपियाड की भांति विज्ञान ओलंपियाड हिन्दी में आयोजित किए जाएं, प्रतियोगिताएं स्कूल , कॉलेज़ स्तर की और व्यावसायिक प्रयोग स्तर की हो सकती हैं । विज्ञान की सामान्य जानकारी के साथ हिन्दी भाषा एवं लिपि की रचनात्मक वैज्ञानिकता की जानकारी की प्रतियोगिताएं हों, कैलीग्राफी, लिपि व्याकरण, मानक वर्तनी, लिप्यंतरण आदि पर प्रश्न हों ।
  2. प्राथमिक शिक्षा में विज्ञान का अध्ययन लोक भाषा हिन्दी में हो । आई टी आई, डिप्लोमा स्तर का अध्यापन लोकभाषा हिन्दी में ,  और उच्च शिक्षा के प्रथम वर्ष की पढ़ाई अंग्रेजी – हिन्दी मिश्रित मोड में हो ।
  3. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में राजभाषा हिन्दी में  शोध पत्रिकाओं का सावधि प्रकाशन हो । इनमें प्रकाशित लेखों को प्रोमोशन के समय प्राथमिक वरीयता  / समान मान्यता दी जाए ।
  4. स्कूलों, कॉलेजों, विश्व विद्यालयों में हिन्दी में इंटरनेट सुविधा, ओपेन डोमेन में शैक्षणिक  सॉफ्टवेयर, यूटिलिटी आदि  कंप्यूटर पर पूर्व लोडित हों ।

   प्रौद्योगिकी

  1. नागरी लिपि के कम से कम दस सुंदर मानक ऑपेन टाइप फोंट व्यावसायिक प्रयोग के लिए भी मुफ्त, मुक्त ओपेन डोमेन में सर्वसुलभ कराए जाएं । यह जनहित में दूरगामी कदम होगा।

 

  1. स्कूलों-कॉलेजों में नागरीOCR, Open Office, Library Info System, Accounting  Software, School Management Software आदि उपलब्ध कराए जाएं। भारतीय भाषा कम्प्यूटिंग सुविधा अनिवार्य हो । कंप्यूटर की खरीद में नागरी की-बोर्ड और पूर्व लोडित भारतीय भाषा सॉफ्टवेयर  एवं यूटीलिटी अनिवार्य हों ।
  2. नागरी टंकण के लिए INSCRIPT मानक,  और लिप्यंतरण  के लिए नागरी-रोमन मानक INSROT के  प्रयोग को बढ़ावा दिया जाए ।
  3. वेब पर डोमेन नेम नागरी में भी स्वीकार्य हों । इनकी उपलब्धता को ICANN  से स्वीकृति तो मिली है, लेकिन इसके  प्रयोग प्रसार को भारत सरकार सुनिश्चित करे ।
  4. नागरी में कंटेट क्रियेशनऔर वेब सर्विस इंटीग्रेशन और  XML आदि मानकों पर भी काम

किया जाए ।    नागरी लिपि पर आधारित फोनीकोड का विकास किया जाए । यूनीकोड ग्राफिम(रूपिम) आधारित है, फोनीकोड फोनिम (स्वनिम)  आधारित है । अक्षर (सिलेबल) ध्वनि को कोडित करते हैं । भारत की विशिष्ट देन होगा ।

  1. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रमुख विषयों पर शोध पत्रिकाओं और शोध ग्रंथों के प्रकाशन लक्ष्य निर्धारित किए जाएं,  और तदनुसार कार्यवाही हो ।
  2. लैब में सभी उपकरणों पर नाम और विशिष्टताओं का हिन्दी में भी उल्लेख हो । मन्युअल हिन्दी में भी हों जिसे लैब सहायक भी आसानी से समझ सकें । लैब में उपकरण सुधार और नए प्रोजेक्ट डिजायन से लैब सहायकों में विज्ञान की समझ का आकलन सम्भव है । 
  3. कम से कम एक मिनी प्रोजेक्ट की रिपोर्ट हिन्दी में भी हो,  तकनीकी प्रोजेक्ट डिजायन की मौखिक प्रस्तुति परीक्षा में आस पास के किसान, व्यापारी  आदि प्रयोगकर्ताओं को भी बुलाया जाए । उनके प्रश्नोत्तरों से विज्ञान प्रसार के प्रभाव को मापा जा सकता है ।

प्रसार प्रविधियाँ

  1. राज्य स्तर की पर्यटन सूचनाएं नागरी लिपि में भी हों, क्योंकि धर्म स्थलों और पुरातत्व अवशेषों को देखने जन सामान्य पर्यटक पूरे देश से आते हैं ।
  2. शिक्षा में भारतीय भाषाओं और लिपि के प्रयोग संवर्धन की दिशा में विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है । सभी सरकारी विभागों और इनके सभी  प्रतिष्ठानों में हिन्दी में वेबसाइट पर कंटेंट अद्यतन किए जाने की समय समय पर समीक्षा हो ।
  3. ज्ञान पूर्ति के लिए अनुवाद आवश्यक है, लेकिन सरकारी कार्यालयों में वर्तमान अनुवाद विधा ने हास्यस्पद स्थिति मे ला खड़ा किया है । अनुवाद लेखक-उन्मुखी है, प्राय: एक-व्यक्ति परक है । प्रस्तावित है अनुसृजन विधा  जो पाठक- केन्द्रित है, टीम परक है,  सुबोध और नवाचार प्रेरक है ।
  4. विज्ञान लेखन की समालोचना  का अभाव है, इस दिशा में विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है ।
  5. इन्नोवेशन डिकेड में मीडिया की भूमिका को विज्ञान परक बनाने के लिए नीति निर्धारण और मीडिया के प्रबंध निर्णायकों से बात कर विज्ञान प्रसार की दिशा में प्रभावकारी कदम उठाने की आवश्यकता है ।
  6. निगरानी के लिए  एक स्वतंत्र समीक्षा संस्था  बनाई जाए जो लक्ष्य और दयित्व  निर्धारित करे, और समय समय पर हिन्दी में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोग, व्यवहार एवं शोध प्रगति, विज्ञान प्रसार कार्यक्रमों के प्रभाव (इम्पेक्ट),  और प्रयोग-प्रसार की समस्याओं पर  सर्वे कर परिणाम प्रकाशित करे, तथा केन्द्रीय  एवं राज्य सरकार में  नीति अनुपालन के लिए दबाब डाले ।

 

प्रस्तावित  लक्ष्य एवं  दायित्व

 

लक्ष्य

दायित्व

उच्च तकनीकी शिक्षा में पाठ्यक्रम में प्रथम वर्ष की पढ़ाई हिन्दी-इंग्लिश मिश्रित भाषा  में हो । नागरी ओलंपियाड, वर्तनी मानकीकरण ...  

मानव संसाधन विभाग, UGC, AICTE, MCI, PCI, आदि तथा राज्यों के  शिक्षा विभाग

सरकारी अनुदान से विकसित फोंट, सॉफ्टवेयर   आदि सूचना प्रौद्यिगिकी व्यावसायिक स्तर भी जन हित में प्रयोग की जा सके। 24x7 हेल्पलाइन हो। डोमेन नेम नागरी में हो । फोनीकोड का विकास  हो। मानकओं का अनुपालन हो ।

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग

राजकीय कार्यालयों, स्कूलों, तकनीकी संस्थानों में  कंप्यूटर, “आकाश”  टेब्लेट की खरीद में नागरी की-बोर्ड एवं हिन्दी सॉफ्टवेयर   पूर्व लोडित  अनिवार्य हो ।

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, मानव संसाधन विभाग

अनुसृजन विधा से विज्ञान-प्रौद्योगिकी ज्ञान सृजन विषय विशेषज्ञों के सहयोग से  हो । ACR में भी इसका विशेष उल्लेख हो।

DST, DBT, DIT, DOT, DES, DEF, DRDO, ISRO, MHRD, MH&FW,  और इनके  अंतर्गत प्रतिष्ठानों के सभी वैज्ञानिकों का

सभी वित्त पोषित सेमीनार, कॉन्फरेंस, वर्कशॉप में 20 प्रतिशत प्रस्तुतियाँ  - चर्चा एवं प्रिंट - में हिन्दी / लोक भाषा में हों ।

DST, DBT, DIT, DOT, DES, DEF, DRDO, ISRO, MHRD, MH&FW,  etc.

राजभाषा हिन्दी में  शोध स्तरीय प्रकाशन लक्ष्य  

1.इलैक्ट्रोनिकीएवकम्प्यूटिंग/ संज्ञानिकी शोध अनुसृजन: 03 हज़ार पृष्ठ प्रति वर्ष

पुस्तक सृजन :  05 हज़ार पृष्ठ प्रति वर्ष  

2.  विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

शोध अनुसृजन: 10 हज़ार पृष्ठ प्रति वर्ष 

पुस्तक सृजन :  25 हज़ार पृष्ठ प्रति वर्ष  

3. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, प्रबंधन और उद्यमिता

शोध अनुसृजन :15 हज़ार पृष्ठ प्रति वर्ष 

पुस्तक सृजन :  50 हज़ार पृष्ठ प्रति वर्ष  

 

 

DIT, DOT  

 

 

DST, DBT, DSIR, DES, DEF, DRDO, ISRO  

 

MHRD, MH&FW

स्टॉफ सेलेक्शन में INSCRIPT आधारी टंकण दक्षता अनिवार्य हो ।

SSC, DOL

पर्यटन स्थलों के नाम संकेत और दुकानों के विज्ञापन पटों पर जगह जानकारी नागरी में हो। यथा संभव वैज्ञानिक विश्लेषण भी दिया जाए ।

सभी राज्यों के पर्यटन विभाग

एयरलाइन व राजधानी आदि में नागरी परिचय और संक्षिप्त सुबोध पर्यटन परिचय राजभाषा  हिन्दी में हो । प्राचीन विज्ञान उपलब्धियोंकी जानकारी प्रेरणास्पद होगी।

नागर विमानन विभाग, रेल विभाग 

राजभाषा हिन्दी के लक्ष्य एवं दायित्व निर्धारण, तथा राजकीय कार्य एवं दायित्व की समीक्षा, और अनुपालन नीति सम्मत कार्यवाही हो ।

राजभाषा विभाग

विज्ञान प्रसार लक्ष्य एवं दायित्व निर्धारण, समीक्षा, और  अनुपालन नीति सम्मत कार्यवाही हो ।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय

स्वतंत्र सर्वे एवं  सघन समीक्षा

गैर-सरकारी संस्था संघ

  

सर्वे के लिए कुछ विषय बिन्दु :

o   NCERT  / CBSE की हिन्दी भाषा पुस्तकों में विज्ञान संबंधी पाठ  - कितने प्रतिशत, इनका आविष्कारात्मक प्रवृति के विकास में कितना योगदान ?

o   स्कूलों में नागरी  लेखन, लिपि व्याकरण, अंक , गिनती, श्रुतिलेखन, और नागरी लेखन सौष्ठव (calligraphy) स्थिति, इंग्लिश-सापेक्ष स्थिति

o   उच्च तकनीकी एवं मेडीकल शिक्षा के पाठ्यक्रमों में नागरी परिचय एवं राजभाषा हिन्दी में संवाद-अभिव्यक्ति की क्षमता  

o   उच्च तकनीकी एवं मेडीकल शिक्षा के प्रथम (संक्रमण) वर्ष में हिन्दी, लोकभाषा और इंग्लिश के मिश्रित मोड में पढ़ाई, असाइनमेंट, परीक्षा  कितने कॉलेज / संस्थानों में

o   उच्च तकनीकी एवं मेडीकल शिक्षा में प्रथम एवं द्वितीय वर्ष  में कितने छात्र आत्महत्या करते हैं, और कारण विश्लेषण एवं सुझाव

o   सरकारी विभागों से वित्त पोषित विज्ञान एवं तकनीकी संगोष्ठी / कार्यशालाओं में कितने पतिशत  पनेल डिस्कशन, चर्चाएं हिन्दी / लोक भाषा में

o   सरकारी विभाग वार हिन्दी में कितने शोध पत्रों का प्रकाशन और प्रौन्नति (प्रमोशन) में उनको प्राथमिक वरीयता / अंग्रेजी में शोध पत्र के  समान मान्यता

o   सरकारी विभाग वार हिन्दी में कितनी शोध पत्रिकाओं के  प्रकाशन की व्यवस्था है, और  लक्ष्य से  कितने दूर

o   सरकारी विभागों से दिए गए विज्ञापनों में कितने हिन्दी में दिए जाते हैं

oविदेश से आए विज्ञान-प्रौद्योगिकी के विद्यार्थियों के लिए कितने केन्द्रीय तकनीकी संस्थानों / विश्व विद्यालयों में हिन्दी का व्यवहार परक  ज्ञान कराया जाता है

o   लोक भाषा / हिन्दी में प्राथमिक अध्ययन से समाज के प्रति संवेदनशीलता, रचनात्मकता, टीमवर्क, आविष्कारोन्मुखी प्रवृति पर प्रभाव

o   . . .    . . .   इत्यादि

 विज्ञान प्रसार का मूल्यांकन 

 

क्रमसंख्या

आयाम

विवरण

1.

What     क्या

लक्ष्य परिणाम

 

2.

Whom   किसको

लाभांवित लोग

 

3.

How      कैसे

नए तरीके

 

4.

Where   कहाँ-कहाँ

नवाचारमय विज्ञान प्रसार ग्रुप / संस्थाओं का नेटवर्क 

 

 किस आयाम में कितनी प्रगति की, इसका अनुमान  लगाकर  विज्ञान प्रसार प्रयासों का मूल्यांकन किया जा सकता है । जहाँ-जहाँ कमी हो, वहाँ नई प्रसार प्रविधि से प्रसार किए जाएं । विज्ञान साहित्य की सतत समालोचना / समीक्षा से ही विज्ञान लेखन सुबोध , रोचक और परिपक्व होगा ।