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कविता
May 22, 2020 • सुनील कुमार गुप्ता
कविता:-
         *"साथी"*
"बहके कदम जब मेरे यहाँ,
बढ़कर थाम लेना साथी।
संग-संग चल कर मेरे तुम,
सत्य- पथ दिखलाना साथी।।
छाए कटुता मन में जब जब,
छोड़ दूर ना जाना साथी।
सुना मधुर गीत यहाँ कोई,
मन को तुम बहलाना साथी।।
कहे न बेगाना कोई फिर,
वो राहें दिखलाना -साथी।
निभाये साथ जीवन में जो,
वो साथी तुम बनना-साथी।।"
ःःःःःःःःःःःःःःःःः         
 
कविता:-
     *"घर वापसी"*
"महामारी की बढ़ी चाल,
घर में रहे-सुरक्षित रहे-
तभी बचेगी जान।
फँसे है जो जहाँ कहीं,
वही रहे-
समय की करें पहचान।
घर वापसी की दौड़ में,
खो न जाना-
जान है-जहाँंन है इसे मान।
बेरोज़गार हुए लोग,
भूख से व्याकुल-
घर वापसी को चल पड़े इन्सान।
कब -कहाँ -पहुँचेगे वो-
इसका भी नहीं उन्हें भान।
घर वापसी होगी जरूर,
थोड़ा करो-
सब्र और ध्यान।
महामारी से बचने को,
घर में रहे सुरक्षित रहे-
तभी बचेगी जान।।"
ःःःःःःःःःःःःःःःःः         
 
कविता:-
        *"मन"*
"जान सके तो जाने मन,
कैसे-अपने होते है?
पग-पग  संग निभाए जो,
साथी अपने होते है।।
छोड़ सके न अहं जब तक,
तब मन बसता सवार्थ है।
छोड़ सके उसको जग में,
जीवन बनता यथार्थ है।।
रो न ओ रे मन बावरे,
जो छोड़े संग साथ है।
मिले जीवन पथ पर यहाँ,
जहाँ अपनत्व का साथ है।।"
ःःःःःःःःःःःःःःःःः           
 
कविता:-
      *"फिर तुम याद आये"*
"जीवन में संग चले थे कभी,
यादो के झरोखो से-
फिर तुम याद आये।
बहुत दूर हो तुम हमसे,
कभी मिल न पाओगें-
फिर तुम याद आये।
साया बन संग चले जो,
कभी जीवन में-
फिर तुम याद आये।
यादो के साये गहराने लगे,
भूले थे तुमको-
फिर तुम याद आये।
मिले न जीवन में तुम,
मिलने की आस में-
फिर तुम याद आये।
सपने तो सपने है-साथी,
उसमें भी-
फिर तुम याद आये।।"
ःःःःःःःःःःःःःःः
 
 कविता:-
     *"मेल मिलाप"*
"मेल मिलाप तो अच्छा साथी,
जीवन में अब-
मिलने से डर लगता है।
दूर रह कर ही हम तो साथी,
कर लेगे सब्र-
तुम रहो आबाद दिल कहता है।
महामारी का देख प्रकोप साथी,
क्या-मेल-मिलाप में रखा-
सुरक्षित रहो मन यही दुआ करता है।
स्वस्थ हम रहे-तुम रहो साथी,
मिलेगे मिलने के मौके बहुत-
मन यही कहता है।
मेल-मिलाप तो अच्छा साथी,
जीवन में अब-
मिलने से डर लगता है।।"
ःःःःःःःःःःःःःःःःःः 
 
कविता:-
*"क्या-पाया फिर साथ में?"*
"साथ निभाया साथी तुमने,
क्या-पाया फिर साथ में?
झूठ फ़रेब संग साथी फिर,
खोया जीवन विवाद में।।
बहक रहे यहाँ कदम साथी,
कौन-चलता फिर साथ में?
सत्य-पथ चल साथी यहाँ,
क्या-पाया सौगात में?
छूट गये वो संगी साथी,
यहाँ चले संग- साथ में।
साथ निभाया साथी तुमने,
क्या-पाया फिर साथ में?"
ःःःःःःःःःःःःःःःःःः         
सुनील कुमार गुप्ता
S/0श्री बी.आर.गुप्ता
3/1355-सी ,नयू भगत सिंह कालोनी, 
बाजोरिया मार्ग, सहारनपुर-247001(उ.प्र.)