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समय की महत्ता _
August 19, 2020 • प्रफुल्ल सिंह "बेचैन कलम"
समय की महत्ता _
 
समय का सदुपयोग नामक इस शब्द से तात्पर्य है। समय की महत्ता को समझते हुए अपने जीवन के हर क्षेत्र में समय का कुशलता पूर्वक प्रयोग करना। समय एक ऐसी चीज है, जो किसी भी स्थिति में अपने निरंतरता में बाध्यता नहीं आने देती है। यह हर पल चलती ही रहती है। हम मानव के जीवन में इसका सबसे अधिक महत्व है।
 
हमारी सफलता और असफलता इसी पर निर्भर करती है। क्योंकि सदियों से हमारे जीवन में ऐसा होता आया है कि, अगर सही समय पर हम किसी भी काम को सही ढंग से करते हैं। तो हमें निश्चित रूप से सफलता हासिल होती है। परंतु उसी काम को सही ढंग से करने के बावजूद भी अगर उसे सही समय पर नहीं करते हैं। तो हमारा असफल होना निश्चित सा हो जाता है। समय हमारे जीवन का वह बहुमूल्य तथ्य है। जिसे एक बार खो देने के बाद, पुनः हाँसिल नहीं किया जा सकता है। अतः निश्चित रूप से हमें अपने जीवन में सफल होने के लिए इसके महत्व को आत्मसात करना आवश्यक है। 
 
हमारे जन्म से लेकर मृत्यु तक “समय नामक यह शब्द हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा होता है। अपने जीवन में समय का कुशलता पूर्वक उपयोग करना ही कहलाता है। समय किसी का इंतजार नहीं करती है। यह हर-हमेशा चलती ही रहती है। इसकी अमूल्यता का अनुमान हम इन बातों से भी लगा सकते हैं कि, हर सफल आदमी से अगर उसकी सफलता का मूल मंत्र पूछा जाता है। तो, उनके सभी बातों के अलावा एक बात “समय को पहचानना” निश्चित जुड़ा होता है। जो मनुष्य जीवन में समय की मूल्यता को नहीं समझता है। उसके द्वारा जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता हाँसिल करना असंभव है।
 
जिस प्रकार दूध से एक बार दही बना देने के बाद उसे पुनः दूध के रूप में प्राप्त नहीं किया जा सकता है। ठीक उसी प्रकार जीवन में जो क्षण बीत जाता है। उसे पुनः प्राप्त करना संभव नहीं है। हर मनुष्य के जीवन में एक सीमित समय होता है और जब इसका अंत हो जाता है। तो हमारे जीवन का भी अंत हो जाता है। समय वह रत्न है, जिसका सही ढंग से उपयोग करने पर गरीब भी अमीर बन जाता है और गलत ढंग से प्रयोग करने पर अमीर-से-अमीर व्यक्ति भी गरीब हो जाता है। अर्थात जो लोग समय को बर्बाद करते हैं। समय उसे बर्बाद कर देती है। समय के महत्तता और निरंतरता को ध्यान में रखते हुए कविवर कबीरदास जी ने ठीक ही लिखा है _ “काल करै सो आज कर, आज करै सो अब, पल में परलै होएगी, बहुरी करौगे कब॥”
 
अर्थात हमें शीघ्रता से समय रहते अपना काम पूरा कर लेना है। अन्यथा हम मुंह ताकते रह जाएंगे। अतः निश्चित रूप से किसी भी मनुष्य को अपने जीवन के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए समय का सदुपयोग करना अनिवार्य है मानव जीवन का प्रत्येक क्षण अमूल्य है। यदि एक क्षण का भी दुरुपयोग होता है। तो मानव सभ्यता का विकास चक्र रुक जाता है। एक पल की शिथिलता जीवन भर का पश्चाताप बन जाती है।
 
संसार में आज तक जिस मनुष्य ने समय के मूल्य को पहचाना है और उसका सदुपयोग किया है। उन्होंने ही दुनिया के समक्ष अपना लोहा मनवाया है। हम मानव समय के साथ निरंतर चल नहीं पाते हैं। जबकि समय नामक अमूल्य संपदा का भंडार हमेशा हमारे पास होता है। और जब हम इस मूल्यवान संपदा को बिना सोचे समझे खर्च कर देते हैं। तब हमें इसकी महत्ता समझ में आती ।है परंतु यह एक ऐसी चीज है। जिसे एक बार खो देने के बाद हमें पछताने के सिवा कुछ हाथ नहीं लगता है। इसलिए तो विद्वानों ने भी कहा है कि, समय रहते हमें समय की महत्ता को समझ लेनी चाहिए तभी हम जीवन में सफल हो पाएंगे। इतना ही नहीं कई विद्वानों ने तो समय की महत्ता को स्पष्ट करने हेतु अपना विचार भी लिखे हैं।
 
समय ही एक ऐसी चीज है। जो हमें ऊंचाई की शिखर तक पहुंचा सकती है। और हमें गर्त में भी ले जा सकती है। समय दुनिया के उन चीजों में अपना स्थान रखती है जिस पर दुनिया के किसी भी चीज का वश नहीं चलता है। क्योंकि इसे न कोई शुरू कर सकता है, न अंत। न कोई खरीद सकता है, न कोई बेच सकता है। कुल मिलाकर कहें तो, समय पूर्ण रूप से स्वतंत्र है। यह एक ऐसा शासक है, जो दुनिया के समस्त संपदा को अपने अनुसार चलाती है। यहां तक कि हमारी प्रकृति भी समय के अनुसार ही चलती है। 
 
मानव खोए हुए स्वास्थ्य को भी बुद्धिमान वेदो की सम्मति पर चलकर, पुष्टि-कारक औषधियों का सेवन करके तथा संयम जीवन व्यतीत करके एक बार फिर प्राप्त कर लेता है। भूली हुई और खोए हुए प्रतिष्ठा को मनुष्य थोड़े से शर्म से पुनः प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है। सदियों के भूले-बिछड़े मिल जाते हैं। परंतु जीवन के जो छन एक बार चले गए। वह फिर इस जीवन में नहीं मिलता। कितनी अमूल्यता है क्षणों की, कितनी तीव्रता है, इसकी गति में। जो न आते मालूम पड़ते हैं, न जाते। परंतु चले जाते हैं।
 
जो अपने एक क्षण का भी अपव्यय नहीं करते, अपितु अधिक से अधिक उसका उपयोग अर्थात समय का सदुपयोग करते हैं। यही कारण है कि, संसार का महान से महान और कठिन से कठिन कार्य भी उनके लिए सुलभ हो जाता है। अब यह आपके ऊपर है कि, इन क्षणो का आप कैसे उपयोग करते हैं?
 
निद्रा में या निजी कार्य पूर्ति में, विद्या में या विवाद में, मैत्री में या कलह में, रक्षा में या परपीडन में। समय की अमूल्यता की घोतक कबीर की पंक्तियां भी कितनी महान है। “काल करै सो आज करै, आज करै सो अब, पल में परलै होएगी बहुरी करैगा कब
 
प्रफुल्ल सिंह "बेचैन कलम"
शोध प्रशिक्षक एवं साहित्यकार
पोस्ट - गोमती नगर. जनपद - लखनऊ (उत्तर प्रदेश)