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स्वप्न - बेटी का बाप
April 25, 2020 • ऋचा पांडे

1-----स्वप्न - बेटी का बाप (Poem)-----

वो दरवाजे पे खड़ी मुस्कुरा रही थी
चिड़ियों को देख खिलखिला रही थी
तभी मां ने पीछे से उसको गोद में उठाया
और वह जोर से चिल्लाई "पापा ओ पापा"
"देखो ना! माँ मुझे खेलने नहीं दे रही"
और अचानक से मेरी नींद खुल गई
घडी में सुबह के 9 बज रहे हैं
अरे! मुझे तो देर हो गई.. आज तो बॉस पक्का काम से निकलेगा
मेरा ये रोज का सपना मुझे देश से निकलेगा
कल मन की बात उसको बोलूंगा
मुझे अब बेटी का बाप बनना है
उसकी तोतली आवाजों से मुझे पापा सुनना है
हर रोज सोचता हूँ आज बोलूंगा और हर रोज डर जाता हूँ
क्या करूँ, अजीब उलझन है.. दोनों की!
उसे एक ही बच्चा रखना है और मुझे अपना सपना सच करना है और उसे अपना करना है
ये कैसी औरत है भगवान! जिसे सिर्फ बेटा ही रखना है
तभी पीछे से आवाज आई, क्या बात है.. आज आपने चश्मा नहीं पहना..
अरे नही! देदो! देर हो रही है ऑफिस के लिए..
सुनो..मुझे कुछ कहना था..
जानती हो आज फिर वही सपना मुझे आया
खुद को बेटी का बाप बना पाया|
रोज रोज बोलती हूँ बेटी नही बेटा चाहिए
और तुमको बेटी ही क्यू चाहिए??
अब उसको क्या बोलू
बेटी के सारे त्याग कैसे तोलु
कैसे कहूं कि वो बेटी ही है जो हर रिस्तो के ताने बाने को बूना है
माँ बाप की खुशियों के लिए हर दर्द सहा है
बेटों का क्या आज मेरे कल बीबी के होंगे
उनके लिए सब रिस्ते भरम होंगे
जिसको हम आज चलना सिखाएंगे
वही कल हमको अनाथश्रम छोड़ आएंगे
थोड़ी देर बाद उस आश्रम में बेटी आएगी
और रोते हुए बोलेगी पापा हम आपको घर ले जायेंगे....
 
2 ----- मां------------
मां यदि तुम होती,,
सारे सपने मेरे होते..इन सपनों का मै होता।
घर का आंगन.. घर में झूला,
इन झूलों पर मै होता।
मां यदि तुम होती,,
सारे सपने मेरे होते..
ना होती कोई कविता, कहानी,
ना ही अब मैं रोता हूं,
तेरे बिन ना जाने कैसे
इतनी राते सोता हूं।
सिर पर आंचल, होठ पर लोरी,
इन लोरी में मैं होता,
मेरी मुट्ठी मे आंचल ,
इन आंचल का मैं होता,
मां होती यदि पास मेरे तुम
रात चैन की मैं सोता।
मां यदि तुम होती,,, सारे सपने मेरे होते इन सपनों
का मै होता...
बड़ा हुआ हूं अब मैं,
पर याद तुम्हारी आती हैं,
घर से ऑफिस, ऑफिस से घर
बिना टिफिन के जाता हूं,
भूखे आता भूखे रहता
भूखे ही सो जाता हूं।
मेरे टिफिन में भी रस मलाई,
इन रस मलाई का मैं होता
मां यदि तुम होती
बिन खाए मैं ना सोता
मां यदि तुम होती... सारे सपने मेरे होते,,,,
इन सपनों का मैं होता।।।
 
3------------कोरोना-------
हर घर में यहीं नारा है,
कोरोना को हराना है।
इसने कैसा चक्कर चलाया,
बड़े बड़ों को घर में बैठाया,
अब इसको भी भागना है,
फिर से घूमने जाना है।
थाली से सब्जी गायब ,
मुंह से पान और मावा गायब,
महंगा दौर जमाना हैं,
फिर से पनीर पापड़ खाना है।
कोरोना को हराना है।।
 
 
4---------कोरोना------
ऐ कोरोना हमसे तुम डरो ना,
हम चीन नहीं हम पाक नही,
हम भारत के नवाब है।
मेरा कुछ नहीं जायेगा,
तेरा काम तमाम हैं।
जहां मोदी  जैसे मंत्री,
और डाक्टर मेरे भगवान हैं,
वहां तू क्या कर पायेगा,
जहां २४ घण्टे  पुलिस तैयार है।
ऐ कोरोना हमसे तुम डरो ना।।
 
नाम: ऋचा पांडे